Shayari

Tu jaruri sa hai mujko | तू ज़रूरी सा है मुझको

Tu jaruri sa hai mujko | तू ज़रूरी सा है मुझको


ऐसा लगा मुझे पेहली दफा

तन्हा मैं हो गयी यारा

 

हो.. ऐसा लगा मुझे पेहली दफा

तन्हा मैं हो गयी यारा

हू परेशन सी मैं

अब ये केहने के लिये

तू ज़रूरी सा है मुझको ज़िंदा रेहने के लिये

हो.. तू ज़रूरी (तू ज़रूरी)

सा है मुझको (सा है मुझको)

ज़िन्दा रेहने के लिये (ज़िन्दा रेहने के लिये)

 

ऐसा लगा मुझे पेहली दफा

तन्हा मैं हो गया यारा

हू परेशन सा मैं

अब ये केहने के लिये

 

तू ज़रूरी सा है मुझको ज़िन्दा रेहने के लिये

हॉ.. तू ज़रूरी (तू ज़रूरी)

सा है मुझको (सा है मुझको)

ज़िंदा रेहने के लिये (ज़िंदा रेहने के लिये..)

 

धड़के आँखों में दिल मेरा

जब क़रीब आउ तेरे

मे.. देखूँ मैं जब भी आईना

हाँ तू ही रूबरू रहे मेरे

 

इश्क़ की मौज में आ

आजा बेहने के लिये

तू ज़रूरी (तू ज़रूरी)

सा है मुझको ज़िंदा रेहने के लिये

आ.. तू ज़रूरी (तू ज़रूरी)

सा है मुझको (सा है मुझको)

ज़िंदा रेहने के लिये (ज़िंदा रेहने के लिये)

तू ज़रूरी..

 

माँगू ना कोई आसमान दो सितारों का जहाँ

बनजा तू मेरा हुमसफर ना मुझे चाहिये कोई मुक़ाम

दिल ही काफी है तेरा मेरे रेहने के लिये

 

तू ज़रूरी सा है मुझको ज़िंदा रेहने के लिये

हो.. तू ज़रूरी (तू ज़रूरी)

आ है मुझको (सा है मुझको)

ज़िंदा रेहने.. (ज़िंदा रेहने..)

तू ज़रूरी (तू ज़रूरी)

सा है मुझको

ज़िंदा रेहने के लिये

तू ज़रूरी..

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